पहली जनवरी को ही क्यों मनाया जाता है नए साल का जश्न
लेकिन आपने कभी सोचा है कि जनवरी ही साल का पहला महीना क्यों है या फिर एक जनवरी से ही साल क्यों शुरू हो रहा है.
दरअसल, जनवरी, रोमन कैलेंडर के मुताबिक़ साल का पहला महीना है. इस कैलेंडर को रोमन सम्राट जूलियस सीज़र ने 2,000 साल पहले शुरू किया था.
लेकिन आप इसका श्रेय केवल जूलियस सीज़र को नहीं दे सकते, इसका श्रेय ग्रेगोरिया तेरहवें पोप को भी दिया जा सकता है.
दरअसल, प्राचीन रोमन में जनवरी एक महत्वपूर्ण महीना था क्योंकि यह वहां के ईश्वर जेनस के नाम पर रखा गया था.
रोमन परंपराओं के मुताबिक़ जेनस को दो चेहरों यानी 'शुरुआत और ख़त्म' का भगवान कहा जाता है.
इंग्लैंड के यूनिवर्सिटी ऑफ़ बर्मिंघम के प्रोफ़ेसर डायना स्पेंसर बताती हैं, "यह एक साथ आगे और पीछे, दोनो वक़्त को देखने से जुड़ा है. ये भी कह सकते हैं कि साल में कोई मौक़ा ऐसा हो जब कोई फ़ैसला लेना हो तो हम यहीं से शुरुआत कर सकते हैं."
जनवरी को साल का पहला महीना बनाए जाने के पीछे ये बात तार्किक लगती है. ये वही वक़्त होता है जब यूरोप में दिनों की लंबाई दक्षिणायण के बाद बढ़नी शुरू होती है.
प्रोफ़ेसर स्पेंसर बताती हैं, "रोम में इन दिनों को बेहतर अंदाज़ में लिया जाता था क्योंकि छोटे और अंधेरे दिन ख़त्म हो जाते थे. और वो ठंडा मौसम भी जिसमें कुछ नहीं उपजता था. लेकिन उन दिनों का रिफ्लेक्शन मौजूद रहता था."
जैसे जैसे रोमन साम्राज्य शक्तिशाली होते गए उन्होंने अपने कैलेंडर को फैलाना शुरू किया.
जिन देशों में ईसाईयत का दबदबा है, वो सारे देश 25 मार्च को नया साल मनाना चाहते थे. रोमन कैथोलिक मान्यताओं में इसकी वजह ये बताई गई कि विशेष दूत गैबरियल ने वर्जिन मैरी को इस दिन ही संदेश दिया था कि उन्हें ईसा को जन्म देना है.
स्पेंसर बताती है, "क्रिसमस तो तब मनाया जाता था जब ईसा का जन्म हुआ है, लेकिन इसका एलान तो मार्च में ही हुआ था कि मैरी ईश्वर के नए अवतार को जन्म देने वाली हैं. यह वो समय था जहां से ईसा की कहानी शुरू हुई, तो नए साल को मनाने के लिए ये ठीक वक़्त था."
लेकिन 16वीं शताब्दी में पोप ग्रेगोरी तेरहवें ने ग्रेगोरियन कैलेंडर की शुरुआत की और पहली जनवरी को साल का पहला दिन बनाया और ये रोमन कैथोलिक देशों में भी मान्य हो गया.
लेकिन ब्रिटेन ने पोप की बातों को मानने से इनकार कर दिया और 1752 तक ब्रिटेन के निवासी 25 मार्च को नया साल मनाया करते थे.
ब्रेक्सिट से सालों पहले 1752 में इंग्लैंड की संसद में इस बात पर सहमति बनी थी कि ब्रिटेन को नए साल की शुरुआत के मामले में बाक़ी यूरोपीय देशों के साथ चलना होगा और इसके बाद वहां भी पहली जनवरी को नए साल का जश्न मनाया जाने लगा.
दरअसल, जनवरी, रोमन कैलेंडर के मुताबिक़ साल का पहला महीना है. इस कैलेंडर को रोमन सम्राट जूलियस सीज़र ने 2,000 साल पहले शुरू किया था.
लेकिन आप इसका श्रेय केवल जूलियस सीज़र को नहीं दे सकते, इसका श्रेय ग्रेगोरिया तेरहवें पोप को भी दिया जा सकता है.
दरअसल, प्राचीन रोमन में जनवरी एक महत्वपूर्ण महीना था क्योंकि यह वहां के ईश्वर जेनस के नाम पर रखा गया था.
रोमन परंपराओं के मुताबिक़ जेनस को दो चेहरों यानी 'शुरुआत और ख़त्म' का भगवान कहा जाता है.
इंग्लैंड के यूनिवर्सिटी ऑफ़ बर्मिंघम के प्रोफ़ेसर डायना स्पेंसर बताती हैं, "यह एक साथ आगे और पीछे, दोनो वक़्त को देखने से जुड़ा है. ये भी कह सकते हैं कि साल में कोई मौक़ा ऐसा हो जब कोई फ़ैसला लेना हो तो हम यहीं से शुरुआत कर सकते हैं."
जनवरी को साल का पहला महीना बनाए जाने के पीछे ये बात तार्किक लगती है. ये वही वक़्त होता है जब यूरोप में दिनों की लंबाई दक्षिणायण के बाद बढ़नी शुरू होती है.
प्रोफ़ेसर स्पेंसर बताती हैं, "रोम में इन दिनों को बेहतर अंदाज़ में लिया जाता था क्योंकि छोटे और अंधेरे दिन ख़त्म हो जाते थे. और वो ठंडा मौसम भी जिसमें कुछ नहीं उपजता था. लेकिन उन दिनों का रिफ्लेक्शन मौजूद रहता था."
जैसे जैसे रोमन साम्राज्य शक्तिशाली होते गए उन्होंने अपने कैलेंडर को फैलाना शुरू किया.
जिन देशों में ईसाईयत का दबदबा है, वो सारे देश 25 मार्च को नया साल मनाना चाहते थे. रोमन कैथोलिक मान्यताओं में इसकी वजह ये बताई गई कि विशेष दूत गैबरियल ने वर्जिन मैरी को इस दिन ही संदेश दिया था कि उन्हें ईसा को जन्म देना है.
स्पेंसर बताती है, "क्रिसमस तो तब मनाया जाता था जब ईसा का जन्म हुआ है, लेकिन इसका एलान तो मार्च में ही हुआ था कि मैरी ईश्वर के नए अवतार को जन्म देने वाली हैं. यह वो समय था जहां से ईसा की कहानी शुरू हुई, तो नए साल को मनाने के लिए ये ठीक वक़्त था."
लेकिन 16वीं शताब्दी में पोप ग्रेगोरी तेरहवें ने ग्रेगोरियन कैलेंडर की शुरुआत की और पहली जनवरी को साल का पहला दिन बनाया और ये रोमन कैथोलिक देशों में भी मान्य हो गया.
लेकिन ब्रिटेन ने पोप की बातों को मानने से इनकार कर दिया और 1752 तक ब्रिटेन के निवासी 25 मार्च को नया साल मनाया करते थे.
ब्रेक्सिट से सालों पहले 1752 में इंग्लैंड की संसद में इस बात पर सहमति बनी थी कि ब्रिटेन को नए साल की शुरुआत के मामले में बाक़ी यूरोपीय देशों के साथ चलना होगा और इसके बाद वहां भी पहली जनवरी को नए साल का जश्न मनाया जाने लगा.
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